Make your own free website on Tripod.com

पुराण विषय अनुक्रमणिका

PURAANIC SUBJECT INDEX

( Ra, La)

HOME

Yogalakshmi - Raja  (Yogini, Yogi, Yoni/womb, Rakta/blood, Raktabeeja etc. )

Rajaka - Ratnadhaara (Rajaka, Rajata/silver, Raji, Rajju, Rati, Ratna/gem etc.)

Ratnapura - Rathabhrita(Ratnamaalaa, Ratha/chariot , rathantara etc.)

Rathaswana - Raakaa (Rathantara, Ramaa, Rambha, Rambhaa, Ravi, Rashmi, Rasa/taste, Raakaa etc.) 

Raakshasa - Raadhaa  (Raakshasa/demon, Raaga, Raajasuuya, Raajaa/king, Raatri/night, Raadhaa/Radha etc.)

Raapaana - Raavana (  Raama/Rama, Raameshwara/Rameshwar, Raavana/ Ravana etc. )

Raavaasana - Runda (Raashi/Rashi/constellation, Raasa, Raahu/Rahu, Rukmaangada, Rukmini, Ruchi etc.)

Rudra - Renukaa  (Rudra, Rudraaksha/Rudraksha, Ruru, Roopa/Rupa/form, Renukaa etc.)

Renukaa - Rochanaa (Revata, Revati, Revanta, Revaa, Raibhya, Raivata, Roga/disease etc. )

Rochamaana - Lakshmanaa ( Roma, Rohini, Rohita,  Lakshana/traits, Lakshmana etc. )

Lakshmi - Lava  ( Lakshmi, Lankaa/Lanka, Lambodara, Lalitaa/Lalita, Lava etc. )

Lavanga - Lumbhaka ( Lavana, Laangala, Likhita, Linga, Leelaa etc. )

Luuta - Louha (Lekha, Lekhaka/writer, Loka, Lokapaala, Lokaaloka, Lobha, Lomasha, Loha/iron, Lohit etc.)

 

 

STORY OF DEMONESS LANKAA

-          Radha Gupta

After crossing the ocean, Hanumana reached Lankapuri and saw a demoness Lanka protecting that town. Hanuman asked for permission to enter the town but the demoness denied and slapped him also. Hanuman roared and pushed her slightly thinking her a woman. The demoness felt herself quite uncomfortable and permitted him to enter the town. She also told Hanuman about that boon she had received from lord Brahma. Brahma had told her that when a monkey/vaanara would come and overpower her, a great fear will appear for all demons in Lanka.

            The story deals with wisdom symbolized as Hanuman and a toxic belief symbolized as demoness Lanka. Living in body-consciousness, every person is overpowered with this belief that situation or person is responsible for his miseries. He himself is perfect but others (any situation or a person) make him miserable. He lives his whole life with this belief and continuously plays a blame game. Now, it becomes obvious that he creates a lot of negative thoughts for those responsible for his miseries.

            The story indicates that it is a great illusion. Wisdom or a wise person always knows that a situation or a person is never responsible for one’s miseries. A person or a situation comes as a stimulant but a person himself is responsible for his misery because he is the only creator of his thoughts. A person creating higher elevated thoughts never feels misery even in a difficult tough situation whiel another person, creating low, toxic, negative thoughts never feels joy or happiness in a very comfortable situation. Someone can cheat but can’t give misery. Misery totally depends on a person’s own thinking. This knowledge or self responsibility overpowers the first one – a toxic belief symbolized as demoness Lanka and as a result, all kinds of vices symbolized as demons living in Lankapuri fall towards an end.

 

लङ्का नामक राक्षसी के वृत्तान्त के माध्यम से प्रज्ञाशक्ति द्वारा दोषारोपण रूपी प्रबल मान्यता को परास्त करके विकारों के विनाश की अवश्यम्भाविता का चित्रण

 - राधा गुप्ता

कथा का संक्षिप्त स्वरूप

रामकथा (सुन्दरकाण्ड, सर्ग 3) में कहा गया है कि समुद्र को लाँघकर हनुमान जी जब लंकापुरी में प्रवेश करने लगे, तब लंकापुरी की अधिष्ठात्री देवी लंका नामक राक्षसी ने उन्हें रोका और लंका में प्रवेश का आग्रह करने पर उन्हें थप्पड भी मारा। परन्तु हनुमान जी ने सिंहनाद करते हुए एक मुक्का मारकर उस राक्षसी को व्याकुल कर दिया। व्याकुल राक्षसी लंका हनुमान जी से बोली कि आप लंका में प्रवेश कीजिए। अब समस्त राक्षसों के विनाश का समय आ गया है क्योंकि ब्रह्मा जी ने मुझे वरदानदिया था कि जब कोई वानर अपने पराक्रम से तुझे वश में कर ले, तब तुझे समझना चाहिए कि राक्षसों के ऊपर महान् भय आ पहुँचा है।

कथा की प्रतीकात्मकता

कथा के एक – एक प्रतीक को समझना उपयोगी होगा।

1 – हनुमान नामक पात्र मनुष्य की प्रज्ञाशक्ति के प्रतीक हैं।

2- लङ्का नामक राक्षसी उस मान्यता को इंगित करती है जिसके आधीन होकर मनुष्य अपने दुःख के लिए किसी परिस्थिति अथवा व्यक्ति को उत्तरदायी मानता है। इस मान्यता को दोषारोपण – वृत्ति कहा जा सकता है।

3- चूंकि देहाभिमान में स्थित प्रत्येक मनुष्य इस प्रबल मान्यता से ग्रस्त रहता है, इसलिए इसे देहाभिमानी व्यक्तित्व अर्थात् लंका के द्वार पर स्थित रहने वाली राक्षसी कहा गया है।

4- यह मान्यता सामान्य मनुष्य की भाँति प्रज्ञावान को भी प्रताडित करने का प्रयास करती है अर्थात् प्रज्ञावान् पर भी आक्रमण करती है जिसे कथा में लङ्का राक्षसी द्वारा हनुमान को थप्पड मारना कहकर संकेतित किया गया है।

5- प्रज्ञावान् मनुष्य इस ज्ञान में स्थित होता है कि कोई भी परिस्थिति अथवा स्थिति (व्यक्ति) उत्प्रेरक तो हो सकती है, परन्तु किसी को दुःख नहीं दे सकती। दुःख का निर्माता मनुष्य स्वयं है। अतः प्रज्ञावान् मनुष्य उपर्युक्त वर्णित मान्यता (दोषारोपण वृत्ति) से प्रभावित न होकर उस मान्यता को ही प्रताडित करता है जिसे कथा में हनुमान द्वारा लङ्का राक्षसी को मुक्का मारकर व्याकुल बना देना कहा गया है।

6- ब्रह्मा जी का वरदान अवश्य होने (भवितव्यता) को संकेतित करता है।

7- सामान्य मनुष्य अपने दुःख के लिए जब दूसरे को जिम्मेदार ठहराता है, तब उसके प्रति नाना प्रकार के व्यर्थ – नकारात्मक विचारों का निर्माण भी करता है। परन्तु अपने दुःख की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने पर जब दूसरों के प्रति निर्मित किए गए व्यर्थ, विषाक्त नकारात्मक विचारों का निर्माण भी बन्द हो जाता है। इसे ही कथा में वानर द्वारा लंका नामक राक्षसी को वशीभूत कर लेने पर राक्षसों को प्राप्त होने वाले भय के रूप में इंगित किया गया है।

कथा का तात्पर्य

     मनुष्य (जीवात्मा) एक शरीर छोडता है, दूसरा ग्रहण करता है। इस छोडने और ग्रहण करने की लम्बी यात्रा में वह अनेकानेक मान्यताओं का निर्माण कर लेता है जो संस्कार बनकर चित्त में संग्रहीत हो जाती हैं और मनुष्य के चेतन मन को सतत् प्रभावित करती हैं। इन मान्यताओं में कुछ ज्ञानपरक तथा कुछ अज्ञानपरक होती हैं, इसलिए प्रत्येक मान्यता को  ध्यानपूर्वक देखते रहना जीवन की उन्नति के लिए अनिवार्य हो जाता है।

     देहाभिमान (अज्ञान) में रहते हुए प्रत्येक मनुष्य के भीतर यह मान्यता प्रबल रूप से विद्यमान रहती है कि मेरे दुःख कारण मैं स्वयं नहीं हूँ। मेरे दुःख का कारण दूसरे हैं – या तो कोई परिस्थिति अथवा कोई व्यक्ति। अतः स्पष्ट है कि दुःख का विनाश भी तभी होगा जब परिस्थिति अथवा व्यक्ति ठीक होंगे – बदलेंगे। परिस्थिति अथवा व्यक्ति बदलते नहीं और अब मनुष्य दुःख के साथ जीने के लिए विवश हो जाता है। साथ ही जिस परिस्थिति अथवा व्यक्ति को वह अपने दुःख के लिए जिम्मेदार मानता है, उसके प्रति अनेक प्रकार के व्यर्थ, नकारात्मक विचारों का निर्माण भी कर लेता है, जो अन्ततः स्वयं उस मनुष्य को ही हानि पहुँचाते हैं।

     प्रस्तुत कथा के माध्यम से यह संकेत किया गया है कि यद्यपि देहाभिमानी व्यक्तित्व के सामने ही यह मान्यता रूपी राक्षसी विद्यमान रहती है और प्रत्येक को अपने वशीभूत करके पीडित करने का प्रयास करती है परन्तु प्रज्ञा अथवा विवेक का आश्रय लेने वाला मनुष्य इस मान्यता के प्रभाव में नहीं आता प्रत्युत इस मान्यता को ही धक्का देकर दूर हटा देता है जिसे कथा में हनुमान द्वारा लङ्का राक्षसी को मुक्का मारकर व्याकुल बना देना कहा गया है।

     प्रज्ञावान् मनुष्य जानता है कि कोई दूसरा – चाहे परिस्थिति हो अथवा व्यक्ति – किसी को दुःख नहीं दे सकता। परिस्थिति अथवा व्यक्ति दुःख के उत्प्रेरक तो हो सकते हैं, परन्तु किसी को दुःख नहीं दे सकते। दुःख का निर्माण प्रत्येक मनुष्य अपने स्वयं केविचारों से करता है। एक ही बात किसी एक मनुष्य को बहुत पीडित करती है, परन्तु वही बात दूसरे मनुष्य के लिए बिल्कुल नगण्य – न के बराबर होती है। इस प्रकार प्रज्ञावान मनुष्य इस मान्यता के प्रभाव से स्वयं को मुक्त करके न केवल आगे बढ जाता है, अपितु उन व्यर्थ – नकारात्मक विचारों के निर्माण से भी स्वयं को बचा लेता है जिनका निर्माण पूर्वोक्त मान्यता (दोषारोपण) में स्थित रहकर अनिवार्य रूप से किया जाता है। इसे ही कथा में ब्रह्मा के वरदान से राक्षसों को प्राप्त होने वाले भय के रूप में इंगित किया गया है। राक्षसों अर्थात् नकारात्मक विचारों का अस्तित्व काफी सीमा तक तभी तक विद्यमान रहता है जब तक मनुष्य उपर्युक्त वर्णित राक्षसी मान्यता के वशीभूत रहता है।

प्रथम लेखन – 10-3-2014ई. ( फाल्गुन शुक्ल दशमी, विक्रम संवत् 2014)

 

 

It seems that proper explaination of word Lankaa in mythology can be given by English word luck. According to Dr. Lakshminarayan Dhoot, all the events in nature take place according to the game of dice, or chance. But actually, if one is able to rise above nature, then he will find that there is no chance, no luck. Every event is preconceived. In puraanic literature, Raavana has been depicted as the king of Lankaa situated in south. In vedic literature, south is considered the direction of attaining efficiency. Efficiency may be explained as follows. In one goes for performing some work, then the energy consumed for that word is not wholly utilized in performing that work. Some part of it goes waste in the form of noise. Efficiency means to how much extent one can avoid such noise. Noise in Sanskrit is called rava. Therefore, word Ravana can have two meanings – having noise or not having noise. The opposite of Lankaa is Alakaa whose king is Kubera.

लङ्का

टिप्पणी : ऐसा प्रतीत होता है कि लङ्का शब्द की सम्यक् व्याख्या अंग्रेजी भाषा के शब्द लक - भाग्य द्वारा की जा सकती है । डा. लक्ष्मीनारायण धूत के अनुसार इस भौतिक प्रकृति में सारी घटनाएं द्यूत, चांस पर आधारित हैं । कोई घटना घटित हो भी सकती है, नहीं भी ( लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है । यदि प्रकृति से ऊपर उठकर देखा जाए तो प्रकृति में भाग्य या लक जैसी कोई चीज नहीं है । प्रत्येक घटना सुनियोजित रूप से घटित हो रही है ) । पौराणिक साहित्य में दक्षिण दिशा में स्थित लंका के राजा के रूप में रावण का चित्रण किया गया है । वैदिक साहित्य में दक्षिण दिशा दक्षता प्राप्त करने की दिशा है । दक्षता प्राप्त करने से तात्पर्य यह है कि आधुनिक विज्ञान के अनुसार यदि किसी कार्य को करने के लिए ऊर्जा का उपयोग किया जाता है तो उस ऊर्जा का सौ प्रतिशत भाग अपेक्षित कार्य को करने में व्यय नहीं होता । उस ऊर्जा का एक भाग व्यर्थ चला जाता है । दक्षता प्राप्ति से तात्पर्य होगा कि ऊर्जा के व्यर्थ जाने वाले भाग को हम कितना व्यर्थ होने से बचा सकते हैं । व्यर्थ जाने वाले भाग को रव, शोर कहते हैं । रावण शब्द के भी दो अर्थ हो सकते हैं - रव वाला अथवा रव से रहित - रव - न ।

          लङ्का से विपरीत कुबेर की अलका पुरी है जिसके लिए अलका शब्द पर टिप्पणी द्रष्टव्य है ।